यहाँ होती दीपावली में कुत्तों की पूजा जाने क्या है, यमराज से कनेक्शन
छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में पहली बार दीपावली के बाद कुकुर तिहार पर्व मनाया गया. डॉग सेल्टर से जुड़े हुए लोगों ने डॉग्स की पहले पूजा की फिर उनको मिठाई खिलाई. कुकुर तिहार पर्व मुख्य रुप से पड़ोसी देश नेपाल में मनाया जाता है. संभवतः भारत में यह पहला मौका है जब सरगुजा संभाग में इस तरह के कुकुर तिहार पर्व का आयोजन किया गया. पड़ोसी मुल्क नेपाल में हर साल दीपावली के अगले दिन लोग कुकुर तिहार का पर्व लोग मनाते हैं. इस दिन पालूत और स्ट्रीट डॉग्स दोनों की विधिविधान से पूजा की जाती है.
कुकुर तिहार पर्व: मुख्य रुप से पड़ोसी मुल्क नेपाल में मनाए जाने वाले कुकुर तिहार पर्व को पहली बार अंबिकापुर में मनाया गया. डॉग सेल्टर चलाने वाले युवा सुधांशु शर्मा ने हमारी टीम से बातचीत में बताया कि वो अपने डॉग सेल्टर में संभाग भर से घायल डॉग्स को लेकर आते हैं. यहां पर उनका सावधानी से इलाज करते हैं. उनका इलाज करने के साथ-साथ यहां डॉग्स की देखभाल भी अच्छे से की जाती है. डॉग सेल्टर चलाने वाले सुधांशु बताते हैं कि अब तक उनकी टीम ने करीब 7 हजार डॉग्स को रेस्क्य किया है. रेस्क्यू किए गए सभी डॉग्स को ठीक कर वो वापस छोड़ देते हैं. सुधांशु शर्मा का कहना है कि उनके काम में स्थानीय लोगों से भी उनको अपने काम में सहयोग मिलता है.
वफादारी की मिसाल है पेट और स्ट्रीट डॉग्स: कुकुर तिहार पर्व का आयोजन करने वाली डॉग सेल्टर की टीम ने जब हमारी टीम से बातचीत किया तो बताया कि डॉग्स भी इंसानों की तरह ही होते हैं. खुशी में खुशी का इजहार करते हैं. दुखी होने पर दुखी होते हैं. वफादारी में इनका कोई जोड़ नही. जब मालिक की जान पर आफत आती है तो ये वफादारी की मिसाल पेश करने से नहीं चूकते. डॉग्स की वफादारी इंसानों से भी बढ़कर होती है. डॉग्स को वफादारी का सम्मान देने के लिए ये कुकुर तिहार का आयोजन किया गया.
जाने क्या है, मान्यता: ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज के दूत कुत्ते होते हैं. यमराज देवता को प्रसन्न करने के लिए भी डॉग्स की पूजा की जाती है. कुकुर तिहार के दिन डॉग्स को फूलों की माला पहनाई जाती है. डॉग्स को तिलक लगाकर उनकी पूजा होती है. कुकुर तिहार के दिन उनको बढ़िया भोजन भी परोसा जाता है.



