पीएम मोदी की ताबड़तोड़ रैलियों से सातवें आसमान पर चुनावी पारा


महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए हर बीतते दिन के साथ चुनावी पारा बढ़ता जा रहा है। हर पार्टी के नेता लगातार अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी जनसभा और रैलियां कर वोटरों को अपने पाले में लामबंद करने में लगी हैं। वहीं, महाराष्ट्र के रण में अब पीएम मोदी ने भी तेजी और खासी सक्रियता से उतरने जा रहे हैं। इसीलिए एक सप्ताह में वे एक के बाद एक ताबड़तोड़ नौ रैलियां कर भाजपा के चुनाव अभियान को धार देंगे। इसके अलावा पीएम पुणे में एक रोड़ शो भी करेंगे। पीएम के इस दौरे की शुरुआत आज यानी शुक्रवार से ही हो रही है।

आज नासिक और धुले के दौरे पर पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी शुक्रवार को नासिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह नासिक के अलावा धुले में भी चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। इस बीच, नासिक के पंचवटी में स्थित 300 वर्ष पुराने कालाराम मंदिर संस्थान ने भी प्रधानमंत्री आमंत्रित किया है। इसके लिए कालाराम मंदिर संस्थान की ओर से उन्हें न्योता भेजा गया है।

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प्रधानमंत्री भाजपा के चुनाव अभियान के तहत महाराष्ट्र में एक सप्ताह नौ रैलियों को संबोधित करेंगे और पुणे में एक रोड शो भी करेंगे। पीएम शुक्रवार को धुले और नासिक की जनसभा के बाद 9 नवंबर को अकोला और नांदेड़ में चुनाव प्रचार करेंगे। 12 नवंबर को चिमुर (चंद्रपुर जिला) और सोलापुर में रैलियों को संबोधित करेंगे और शाम को पुणे में एक रोड शो में भाग लेंगे। इसके बाद मोदी 14 नवंबर को राज्य में तीन जगह छत्रपति संभाजीनगर, रायगढ़ और मुंबई में रैलियां करेंगे।

कालाराम मंदिर संस्थान के महंत सुधीरदास महाराज ने पीएम मोदी को भेजे पत्र में 20 मिनट का समय मंदिर में बिताने का आग्रह किया। उन्होंने पत्र में लिखा, आपने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व यहीं से पूजा-अर्चना की शुरुआत की थी। आपने जो प्रण लिया था वह पूरा हो गया है। अब हमारा आग्रह है कि कालाराम मंदिर में दोबारा आकर पूजा-अर्चना करें। अगर, प्रधानमंत्री कालाराम मंदिर आते हैं तो बहुत ही अच्छा होगा। कालाराम मंदिर ट्रस्ट ने पीएम मोदी स्वागत की तैयारियां कर रखी हैं।

गौरतलब है कि इसी वर्ष 22 जनवरी को अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पीएम ने कालाराम मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान की शुरूआत की थी। उन्होंने कठोर व्रत भी शुरू किया था। रामायण काल से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों में पंचवटी का विशेष स्थान है।

 


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